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Wisdom & Morals
Doodh Ka Jala Chhaachh Bhi Phoonk-Phoonk Kar Peeta Hai
एक बार धोखा या आघात खाने के बाद व्यक्ति छोटी-छोटी बातों में भी अत्यधिक सावधानी बरतता है।
Once bitten, twice shy; a person who has had a painful experience becomes overly cautious.
Equivalent: Once bitten, twice shy / A burnt child dreads the fire
- शेयर बाजार में पिछली बार जमापूंजी गँवाने के बाद अब वह बैंक एफडी में भी दस बार सोचकर निवेश करता है—सच है, दूध का जला छाछ भी फूँक कर पीता है।
- एक बेईमान साझेदार से धोखा खाने के बाद अब रमेश किसी नए व्यक्ति पर विश्वास ही नहीं करता; आखिर दूध का जला छाछ भी फूँक कर पीता है।
- ऑनलाइन ठगी का शिकार होने के बाद अब वह सामान्य संदेशों पर भी सतर्क हो जाती है, क्योंकि दूध का जला छाछ भी फूँक कर पीता है।
Source (स्रोत): उत्तर भारतीय ग्रामीण रसोई (Rural Dairy Folk Psychology)
गर्म उबलता हुआ दूध पीने से यदि जिह्वा जल जाए, तो व्यक्ति के मन में ऐसा भय बैठ जाता है कि वह ठंडी, खट्टी छाछ (मट्ठे) को भी यह सोचकर फूँक-फूँक कर पीता है कि कहीं इससे भी मुँह न जल जाए। यह मानव मनोविज्ञान का सजीव चित्रण है।
दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँक कर पीता है
Doodh Ka Jala Chhaachh Bhi Phoonk-Phoonk Kar Peeta Hai
Meaning & Connotation
एक बार धोखा या आघात खाने के बाद व्यक्ति छोटी-छोटी बातों में भी अत्यधिक सावधानी बरतता है।
English Meaning & Significance
"Once bitten, twice shy; a person who has had a painful experience becomes overly cautious."
Sentence Usages & Authentic Examples
Understand accurate usage in daily communication and academic examinations:
शेयर बाजार में पिछली बार जमापूंजी गँवाने के बाद अब वह बैंक एफडी में भी दस बार सोचकर निवेश करता है—सच है, दूध का जला छाछ भी फूँक कर पीता है।
एक बेईमान साझेदार से धोखा खाने के बाद अब रमेश किसी नए व्यक्ति पर विश्वास ही नहीं करता; आखिर दूध का जला छाछ भी फूँक कर पीता है।
ऑनलाइन ठगी का शिकार होने के बाद अब वह सामान्य संदेशों पर भी सतर्क हो जाती है, क्योंकि दूध का जला छाछ भी फूँक कर पीता है।
Origin & Context
उत्तर भारतीय ग्रामीण रसोई (Rural Dairy Folk Psychology)
गर्म उबलता हुआ दूध पीने से यदि जिह्वा जल जाए, तो व्यक्ति के मन में ऐसा भय बैठ जाता है कि वह ठंडी, खट्टी छाछ (मट्ठे) को भी यह सोचकर फूँक-फूँक कर पीता है कि कहीं इससे भी मुँह न जल जाए। यह मानव मनोविज्ञान का सजीव चित्रण है।
यह दुनिया की सबसे सार्वभौमिक लोकोक्तियों में से एक है; हर संस्कृति में आग या गर्म वस्तु से जलने के बाद सतर्कता के ऐसे मुहावरे विद्यमान हैं।
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Frequently Asked Questions (FAQ)
दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँक कर पीता है लोकोक्ति का अर्थ क्या है?
दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँक कर पीता है का हिंदी अर्थ "एक बार धोखा या आघात खाने के बाद व्यक्ति छोटी-छोटी बातों में भी अत्यधिक सावधानी बरतता है।" होता है। अंग्रेजी भाषा में इसका तात्पर्य "Once bitten, twice shy; a person who has had a painful experience becomes overly cautious." है।
What is the English meaning of "Doodh Ka Jala Chhaachh Bhi Phoonk-Phoonk Kar Peeta Hai"?
The English meaning of "Doodh Ka Jala Chhaachh Bhi Phoonk-Phoonk Kar Peeta Hai" (दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँक कर पीता है) is "Once bitten, twice shy; a person who has had a painful experience becomes overly cautious.". An equivalent English saying is "Once bitten, twice shy / A burnt child dreads the fire".
दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँक कर पीता है का वाक्य प्रयोग कैसे करें?
वाक्य प्रयोग: "शेयर बाजार में पिछली बार जमापूंजी गँवाने के बाद अब वह बैंक एफडी में भी दस बार सोचकर निवेश करता है—सच है, दूध का जला छाछ भी फूँक कर पीता है।"
दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँक कर पीता है की उत्पत्ति (Origin) और संदर्भ क्या है?
स्रोत: उत्तर भारतीय ग्रामीण रसोई (Rural Dairy Folk Psychology)। संदर्भ: गर्म उबलता हुआ दूध पीने से यदि जिह्वा जल जाए, तो व्यक्ति के मन में ऐसा भय बैठ जाता है कि वह ठंडी, खट्टी छाछ (मट्ठे) को भी यह सोचकर फूँक-फूँक कर पीता है कि कहीं इससे भी मुँह न जल जाए। यह मानव मनोविज्ञान का सजीव चित्रण है। विशेष तथ्य: यह दुनिया की सबसे सार्वभौमिक लोकोक्तियों में से एक है; हर संस्कृति में आग या गर्म वस्तु से जलने के बाद सतर्कता के ऐसे मुहावरे विद्यमान हैं।