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Wisdom & Morals
Karm Pradhan Vishwa Kari Raakha
विधाता ने इस संसार को कर्म-प्रधान बनाया है; जो मनुष्य जैसा कर्म करता है, उसे निसंदेह वैसा ही प्रतिफल प्राप्त होता है; भाग्य भी पुरुषार्थ के अधीन है।
The universe is governed by the law of action; whatever deeds one performs, that alone one receives in return.
Equivalent: Action is destiny / Fate is shaped by deed
- केवल भाग्य के भरोसे बैठकर हाथ पर हाथ धरे मत रहो; तुलसीदास जी ने कहा है—कर्म प्रधान विश्व करि राखा, जो जस करइ सो तस फलु चाखा।
- उसने शून्य से शुरुआत करके अपने अथक परिश्रम से यह विशाल साम्राज्य खड़ा किया, साबित किया कि कर्म ही प्रधान है।
- संसार में वही आगे बढ़ता है जो अपने कर्म पर विश्वास रखता है, रोने-धोने से कुछ हासिल नहीं होता।
Source (स्रोत): गोस्वामी तुलसीदास कृत 'श्रीरामचरितमानस' (Tulsidas Ayodhya Kanda)
श्रीरामचरितमानस के अयोध्याकाण्ड में भगवान श्रीराम वनगमन के समय लक्ष्मण जी और निषादराज को समझाते हैं: 'कर्म प्रधान बिस्व करि राखा। जो जस करइ सो तस फलु चाखा॥' मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता स्वयं अपने कर्मों से बनता है।
कर्म प्रधान विश्व करि राखा
Karm Pradhan Vishwa Kari Raakha
Meaning & Connotation
विधाता ने इस संसार को कर्म-प्रधान बनाया है; जो मनुष्य जैसा कर्म करता है, उसे निसंदेह वैसा ही प्रतिफल प्राप्त होता है; भाग्य भी पुरुषार्थ के अधीन है।
English Meaning & Significance
"The universe is governed by the law of action; whatever deeds one performs, that alone one receives in return."
Sentence Usages & Authentic Examples
Understand accurate usage in daily communication and academic examinations:
केवल भाग्य के भरोसे बैठकर हाथ पर हाथ धरे मत रहो; तुलसीदास जी ने कहा है—कर्म प्रधान विश्व करि राखा, जो जस करइ सो तस फलु चाखा।
उसने शून्य से शुरुआत करके अपने अथक परिश्रम से यह विशाल साम्राज्य खड़ा किया, साबित किया कि कर्म ही प्रधान है।
संसार में वही आगे बढ़ता है जो अपने कर्म पर विश्वास रखता है, रोने-धोने से कुछ हासिल नहीं होता।
Origin & Context
गोस्वामी तुलसीदास कृत 'श्रीरामचरितमानस' (Tulsidas Ayodhya Kanda)
श्रीरामचरितमानस के अयोध्याकाण्ड में भगवान श्रीराम वनगमन के समय लक्ष्मण जी और निषादराज को समझाते हैं: 'कर्म प्रधान बिस्व करि राखा। जो जस करइ सो तस फलु चाखा॥' मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता स्वयं अपने कर्मों से बनता है।
श्रीमद्भगवद्गीता के 'कर्मण्येवाधिकारस्ते' का लोक मानस में सबसे सटीक और लोकप्रिय अवधी भावानुवाद यही चौपाई है।
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Frequently Asked Questions (FAQ)
कर्म प्रधान विश्व करि राखा लोकोक्ति का अर्थ क्या है?
कर्म प्रधान विश्व करि राखा का हिंदी अर्थ "विधाता ने इस संसार को कर्म-प्रधान बनाया है; जो मनुष्य जैसा कर्म करता है, उसे निसंदेह वैसा ही प्रतिफल प्राप्त होता है; भाग्य भी पुरुषार्थ के अधीन है।" होता है। अंग्रेजी भाषा में इसका तात्पर्य "The universe is governed by the law of action; whatever deeds one performs, that alone one receives in return." है।
What is the English meaning of "Karm Pradhan Vishwa Kari Raakha"?
The English meaning of "Karm Pradhan Vishwa Kari Raakha" (कर्म प्रधान विश्व करि राखा) is "The universe is governed by the law of action; whatever deeds one performs, that alone one receives in return.". An equivalent English saying is "Action is destiny / Fate is shaped by deed".
कर्म प्रधान विश्व करि राखा का वाक्य प्रयोग कैसे करें?
वाक्य प्रयोग: "केवल भाग्य के भरोसे बैठकर हाथ पर हाथ धरे मत रहो; तुलसीदास जी ने कहा है—कर्म प्रधान विश्व करि राखा, जो जस करइ सो तस फलु चाखा।"
कर्म प्रधान विश्व करि राखा की उत्पत्ति (Origin) और संदर्भ क्या है?
स्रोत: गोस्वामी तुलसीदास कृत 'श्रीरामचरितमानस' (Tulsidas Ayodhya Kanda)। संदर्भ: श्रीरामचरितमानस के अयोध्याकाण्ड में भगवान श्रीराम वनगमन के समय लक्ष्मण जी और निषादराज को समझाते हैं: 'कर्म प्रधान बिस्व करि राखा। जो जस करइ सो तस फलु चाखा॥' मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता स्वयं अपने कर्मों से बनता है। विशेष तथ्य: श्रीमद्भगवद्गीता के 'कर्मण्येवाधिकारस्ते' का लोक मानस में सबसे सटीक और लोकप्रिय अवधी भावानुवाद यही चौपाई है।