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Wisdom & Morals
Ati Ka Bhala Na Bolna Ati Ki Bhali Na Chup
किसी भी बात, आचरण या स्वभाव में अत्यधिकता (अति) हानिकारक होती है; न तो अत्यधिक बोलना अच्छा है और न ही बिल्कुल मौन रहना।
Excessive speaking is not good, nor is total silence; moderation and balance in all things is the golden path.
Equivalent: Too much of anything is good for nothing / Moderation in all things
- हर समय बोलते रहना मूर्खता है और अन्याय देखकर चुप रहना कायरता; सच कहा है अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।
- जीवन में संतुलन ही सफलता की कुंजी है, क्योंकि अति का भला न बरसना और अति की भली न धूप।
- नेताजी सभा में निरंतर दो घंटे बोलते रहे और श्रोता ऊबकर चले गए; उन्हें समझना चाहिए कि अति का बोलना कभी भला नहीं होता।
Source (स्रोत): संत कबीर की साखियाँ (Kabir Sakhi Tradition)
संत कबीर का पूरा दोहा है: 'अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।' जीवन में संतुलन (मध्यम मार्ग) को ही सर्वोत्तम धर्म माना गया है।
अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप
Ati Ka Bhala Na Bolna Ati Ki Bhali Na Chup
Meaning & Connotation
किसी भी बात, आचरण या स्वभाव में अत्यधिकता (अति) हानिकारक होती है; न तो अत्यधिक बोलना अच्छा है और न ही बिल्कुल मौन रहना।
English Meaning & Significance
"Excessive speaking is not good, nor is total silence; moderation and balance in all things is the golden path."
Sentence Usages & Authentic Examples
Understand accurate usage in daily communication and academic examinations:
हर समय बोलते रहना मूर्खता है और अन्याय देखकर चुप रहना कायरता; सच कहा है अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।
जीवन में संतुलन ही सफलता की कुंजी है, क्योंकि अति का भला न बरसना और अति की भली न धूप।
नेताजी सभा में निरंतर दो घंटे बोलते रहे और श्रोता ऊबकर चले गए; उन्हें समझना चाहिए कि अति का बोलना कभी भला नहीं होता।
Origin & Context
संत कबीर की साखियाँ (Kabir Sakhi Tradition)
संत कबीर का पूरा दोहा है: 'अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।' जीवन में संतुलन (मध्यम मार्ग) को ही सर्वोत्तम धर्म माना गया है।
यह लोकोक्ति भगवान बुद्ध के 'मज्झिम निकाय' (मध्यम मार्ग / Golden Mean) और अरस्तू के संतुलन सिद्धांत से प्रत्यक्ष साम्य रखती है।
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Frequently Asked Questions (FAQ)
अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप लोकोक्ति का अर्थ क्या है?
अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप का हिंदी अर्थ "किसी भी बात, आचरण या स्वभाव में अत्यधिकता (अति) हानिकारक होती है; न तो अत्यधिक बोलना अच्छा है और न ही बिल्कुल मौन रहना।" होता है। अंग्रेजी भाषा में इसका तात्पर्य "Excessive speaking is not good, nor is total silence; moderation and balance in all things is the golden path." है।
What is the English meaning of "Ati Ka Bhala Na Bolna Ati Ki Bhali Na Chup"?
The English meaning of "Ati Ka Bhala Na Bolna Ati Ki Bhali Na Chup" (अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप) is "Excessive speaking is not good, nor is total silence; moderation and balance in all things is the golden path.". An equivalent English saying is "Too much of anything is good for nothing / Moderation in all things".
अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप का वाक्य प्रयोग कैसे करें?
वाक्य प्रयोग: "हर समय बोलते रहना मूर्खता है और अन्याय देखकर चुप रहना कायरता; सच कहा है अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।"
अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप की उत्पत्ति (Origin) और संदर्भ क्या है?
स्रोत: संत कबीर की साखियाँ (Kabir Sakhi Tradition)। संदर्भ: संत कबीर का पूरा दोहा है: 'अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।' जीवन में संतुलन (मध्यम मार्ग) को ही सर्वोत्तम धर्म माना गया है। विशेष तथ्य: यह लोकोक्ति भगवान बुद्ध के 'मज्झिम निकाय' (मध्यम मार्ग / Golden Mean) और अरस्तू के संतुलन सिद्धांत से प्रत्यक्ष साम्य रखती है।