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Wisdom & Morals
Jitni Chaadar Ho Utne Hi Paanv Pasaarna
अपनी आमदनी, सामर्थ्य, साधनों और औकात के अनुसार ही खर्च या दिखावा करना चाहिए; सामर्थ्य से अधिक व्यय करने से संकट आता है।
Stretch your legs only as far as your blanket extends; live and spend within your actual means and resources.
Equivalent: Cut your coat according to your cloth
- कर्ज लेकर महँगी कार खरीदना बुद्धिमानी नहीं है; समझदार वही है जो जितनी चादर हो उतने ही पाँव पसारे।
- माता-पिता ने सदा सिखाया कि जितनी चादर हो उतने ही पाँव पसारना चाहिए ताकि कभी किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े।
- विवाह में दिखावे के चक्कर में उसने लाखों का कर्ज ले लिया और अब कर्जदार दरवाजे पर खड़े हैं; काश उसने चादर देखकर पाँव पसारे होते।
Source (स्रोत): संत कबीर की लोक-नीति (Kabir's Ethical Verses)
संत कबीर का प्रसिद्ध पद है: 'तेते पाँव पसारिये, जेती लाँबी सौर।' यदि शीत ऋतु में चादर से अधिक पैर फैलाए जाएँगे तो ठंड लगेगी और कष्ट होगा। इसी घरेलू सत्य से आर्थिक मितव्ययिता की नीति बनी।
जितनी चादर हो उतने ही पाँव पसारना
Jitni Chaadar Ho Utne Hi Paanv Pasaarna
Meaning & Connotation
अपनी आमदनी, सामर्थ्य, साधनों और औकात के अनुसार ही खर्च या दिखावा करना चाहिए; सामर्थ्य से अधिक व्यय करने से संकट आता है।
English Meaning & Significance
"Stretch your legs only as far as your blanket extends; live and spend within your actual means and resources."
Sentence Usages & Authentic Examples
Understand accurate usage in daily communication and academic examinations:
कर्ज लेकर महँगी कार खरीदना बुद्धिमानी नहीं है; समझदार वही है जो जितनी चादर हो उतने ही पाँव पसारे।
माता-पिता ने सदा सिखाया कि जितनी चादर हो उतने ही पाँव पसारना चाहिए ताकि कभी किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े।
विवाह में दिखावे के चक्कर में उसने लाखों का कर्ज ले लिया और अब कर्जदार दरवाजे पर खड़े हैं; काश उसने चादर देखकर पाँव पसारे होते।
Origin & Context
संत कबीर की लोक-नीति (Kabir's Ethical Verses)
संत कबीर का प्रसिद्ध पद है: 'तेते पाँव पसारिये, जेती लाँबी सौर।' यदि शीत ऋतु में चादर से अधिक पैर फैलाए जाएँगे तो ठंड लगेगी और कष्ट होगा। इसी घरेलू सत्य से आर्थिक मितव्ययिता की नीति बनी।
दुनिया की लगभग हर प्राचीन सभ्यता (ग्रीक, लैटिन, अरबी) में इस आशय की कहावतें पाई जाती हैं, जो आर्थिक अनुशासन का सार्वभौमिक सिद्धांत है।
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Frequently Asked Questions (FAQ)
जितनी चादर हो उतने ही पाँव पसारना लोकोक्ति का अर्थ क्या है?
जितनी चादर हो उतने ही पाँव पसारना का हिंदी अर्थ "अपनी आमदनी, सामर्थ्य, साधनों और औकात के अनुसार ही खर्च या दिखावा करना चाहिए; सामर्थ्य से अधिक व्यय करने से संकट आता है।" होता है। अंग्रेजी भाषा में इसका तात्पर्य "Stretch your legs only as far as your blanket extends; live and spend within your actual means and resources." है।
What is the English meaning of "Jitni Chaadar Ho Utne Hi Paanv Pasaarna"?
The English meaning of "Jitni Chaadar Ho Utne Hi Paanv Pasaarna" (जितनी चादर हो उतने ही पाँव पसारना) is "Stretch your legs only as far as your blanket extends; live and spend within your actual means and resources.". An equivalent English saying is "Cut your coat according to your cloth".
जितनी चादर हो उतने ही पाँव पसारना का वाक्य प्रयोग कैसे करें?
वाक्य प्रयोग: "कर्ज लेकर महँगी कार खरीदना बुद्धिमानी नहीं है; समझदार वही है जो जितनी चादर हो उतने ही पाँव पसारे।"
जितनी चादर हो उतने ही पाँव पसारना की उत्पत्ति (Origin) और संदर्भ क्या है?
स्रोत: संत कबीर की लोक-नीति (Kabir's Ethical Verses)। संदर्भ: संत कबीर का प्रसिद्ध पद है: 'तेते पाँव पसारिये, जेती लाँबी सौर।' यदि शीत ऋतु में चादर से अधिक पैर फैलाए जाएँगे तो ठंड लगेगी और कष्ट होगा। इसी घरेलू सत्य से आर्थिक मितव्ययिता की नीति बनी। विशेष तथ्य: दुनिया की लगभग हर प्राचीन सभ्यता (ग्रीक, लैटिन, अरबी) में इस आशय की कहावतें पाई जाती हैं, जो आर्थिक अनुशासन का सार्वभौमिक सिद्धांत है।