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Food & Flavors
Bhookhe Bhajan Na Hoy Gopala
भूखे पेट या बुनियादी आवश्यकताओं (रोटी, कपड़ा, मकान) के अभाव में कोई भी धार्मिक साधना, भक्ति, उच्च आदर्श या बौद्धिक कार्य संभव नहीं होता।
An empty stomach cannot sing hymns to the Lord; basic physical sustenance and food are fundamental prerequisites before spiritual or intellectual pursuits.
Equivalent: A hungry man is not a free man / Bread comes before books
- मजदूरों से राष्ट्र निर्माण की बड़ी-बड़ी बातें करने से पहले उनका पेट भरो; सच कहा है भूखे भजन न होय गोपाला।
- जब तक गरीब के घर में चूल्हा नहीं जलेगा, तब तक वह दर्शन की बातें नहीं समझ सकता—भूखे भजन न होय गोपाला।
- कबीरदास जी ने भी ईश्वर से पहले दाल-रोटी की ही प्रार्थना की थी क्योंकि भूखे पेट साधना नहीं हो सकती।
Source (स्रोत): संत कबीर दास जी की निर्गुण वाणी (Kabir's Bhakti Lore)
कबीरदास जी का प्रसिद्ध पद है: 'भूखे भजन न होय गोपाला। ये लै तेरी कंठी माला॥ दो सेर माँगूँ दाल-आटा...'। जब तक शरीर को न्यूनतम अन्न नहीं मिलेगा, मन एकाग्र नहीं हो सकता। यह यथार्थवादी अध्यात्म का अमर उद्घोष है।
भूखे भजन न होय गोपाला
Bhookhe Bhajan Na Hoy Gopala
Meaning & Connotation
भूखे पेट या बुनियादी आवश्यकताओं (रोटी, कपड़ा, मकान) के अभाव में कोई भी धार्मिक साधना, भक्ति, उच्च आदर्श या बौद्धिक कार्य संभव नहीं होता।
English Meaning & Significance
"An empty stomach cannot sing hymns to the Lord; basic physical sustenance and food are fundamental prerequisites before spiritual or intellectual pursuits."
Sentence Usages & Authentic Examples
Understand accurate usage in daily communication and academic examinations:
मजदूरों से राष्ट्र निर्माण की बड़ी-बड़ी बातें करने से पहले उनका पेट भरो; सच कहा है भूखे भजन न होय गोपाला।
जब तक गरीब के घर में चूल्हा नहीं जलेगा, तब तक वह दर्शन की बातें नहीं समझ सकता—भूखे भजन न होय गोपाला।
कबीरदास जी ने भी ईश्वर से पहले दाल-रोटी की ही प्रार्थना की थी क्योंकि भूखे पेट साधना नहीं हो सकती।
Origin & Context
संत कबीर दास जी की निर्गुण वाणी (Kabir's Bhakti Lore)
कबीरदास जी का प्रसिद्ध पद है: 'भूखे भजन न होय गोपाला। ये लै तेरी कंठी माला॥ दो सेर माँगूँ दाल-आटा...'। जब तक शरीर को न्यूनतम अन्न नहीं मिलेगा, मन एकाग्र नहीं हो सकता। यह यथार्थवादी अध्यात्म का अमर उद्घोष है।
स्वामी विवेकानंद ने शिकागो व्याख्यान के बाद भारत लौटकर कहा था: 'भूखे को धर्म का उपदेश देना उसका अपमान करना है।'
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Frequently Asked Questions (FAQ)
भूखे भजन न होय गोपाला लोकोक्ति का अर्थ क्या है?
भूखे भजन न होय गोपाला का हिंदी अर्थ "भूखे पेट या बुनियादी आवश्यकताओं (रोटी, कपड़ा, मकान) के अभाव में कोई भी धार्मिक साधना, भक्ति, उच्च आदर्श या बौद्धिक कार्य संभव नहीं होता।" होता है। अंग्रेजी भाषा में इसका तात्पर्य "An empty stomach cannot sing hymns to the Lord; basic physical sustenance and food are fundamental prerequisites before spiritual or intellectual pursuits." है।
What is the English meaning of "Bhookhe Bhajan Na Hoy Gopala"?
The English meaning of "Bhookhe Bhajan Na Hoy Gopala" (भूखे भजन न होय गोपाला) is "An empty stomach cannot sing hymns to the Lord; basic physical sustenance and food are fundamental prerequisites before spiritual or intellectual pursuits.". An equivalent English saying is "A hungry man is not a free man / Bread comes before books".
भूखे भजन न होय गोपाला का वाक्य प्रयोग कैसे करें?
वाक्य प्रयोग: "मजदूरों से राष्ट्र निर्माण की बड़ी-बड़ी बातें करने से पहले उनका पेट भरो; सच कहा है भूखे भजन न होय गोपाला।"
भूखे भजन न होय गोपाला की उत्पत्ति (Origin) और संदर्भ क्या है?
स्रोत: संत कबीर दास जी की निर्गुण वाणी (Kabir's Bhakti Lore)। संदर्भ: कबीरदास जी का प्रसिद्ध पद है: 'भूखे भजन न होय गोपाला। ये लै तेरी कंठी माला॥ दो सेर माँगूँ दाल-आटा...'। जब तक शरीर को न्यूनतम अन्न नहीं मिलेगा, मन एकाग्र नहीं हो सकता। यह यथार्थवादी अध्यात्म का अमर उद्घोष है। विशेष तथ्य: स्वामी विवेकानंद ने शिकागो व्याख्यान के बाद भारत लौटकर कहा था: 'भूखे को धर्म का उपदेश देना उसका अपमान करना है।'