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Food & Flavors
Soop Bole Toh Bole Chhalni Kya Bole
जो व्यक्ति स्वयं सैकड़ों गंभीर दोषों, पापों और अवगुणों से भरा हुआ हो, उसे किसी दूसरे के छोटे से दोष पर बोलने या उँगली उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
The winnowing basket may speak, but why should the sieve speak when it has seventy-two holes? A heavily flawed person has no right to criticize minor faults in others.
Equivalent: The pot calling the kettle black / People who live in glass houses should not throw stones
- करोड़ों के घोटाले में फंसा नेता जब दूसरे पर पाँच सौ की हेराफेरी का आरोप लगाता है, तो यही कहावत याद आती है—सूप बोले तो बोले, छलनी क्या बोले।
- तुम खुद रोज विद्यालय में देर से आते हो और दूसरों को समय की पाबंदी सिखा रहे हो; सूप बोले तो बोले छलनी क्या बोले!
- दूसरों की निंदा करने से पहले अपने चरित्र की छलनी में झाँककर देखो।
Source (स्रोत): रसोई के पारंपरिक उपकरण सूप व छलनी (Kitchen Utensils Lore)
अनाज फटकने वाले बाँस के 'सूप' (Winnowing basket) में कोई छेद नहीं होता और वह भूसे को अनाज से अलग करता है। किंतु आटे की 'छलनी' में सैकड़ों छेद होते हैं। यदि छलनी सूप के किसी छोटे दोष पर हँसे, तो यह हास्यास्पद है क्योंकि छलनी खुद छिद्रों से भरी है।
सूप बोले तो बोले, छलनी क्या बोले जिसमें बहत्तर छेद
Soop Bole Toh Bole Chhalni Kya Bole
Meaning & Connotation
जो व्यक्ति स्वयं सैकड़ों गंभीर दोषों, पापों और अवगुणों से भरा हुआ हो, उसे किसी दूसरे के छोटे से दोष पर बोलने या उँगली उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
English Meaning & Significance
"The winnowing basket may speak, but why should the sieve speak when it has seventy-two holes? A heavily flawed person has no right to criticize minor faults in others."
Sentence Usages & Authentic Examples
Understand accurate usage in daily communication and academic examinations:
करोड़ों के घोटाले में फंसा नेता जब दूसरे पर पाँच सौ की हेराफेरी का आरोप लगाता है, तो यही कहावत याद आती है—सूप बोले तो बोले, छलनी क्या बोले।
तुम खुद रोज विद्यालय में देर से आते हो और दूसरों को समय की पाबंदी सिखा रहे हो; सूप बोले तो बोले छलनी क्या बोले!
दूसरों की निंदा करने से पहले अपने चरित्र की छलनी में झाँककर देखो।
Origin & Context
रसोई के पारंपरिक उपकरण सूप व छलनी (Kitchen Utensils Lore)
अनाज फटकने वाले बाँस के 'सूप' (Winnowing basket) में कोई छेद नहीं होता और वह भूसे को अनाज से अलग करता है। किंतु आटे की 'छलनी' में सैकड़ों छेद होते हैं। यदि छलनी सूप के किसी छोटे दोष पर हँसे, तो यह हास्यास्पद है क्योंकि छलनी खुद छिद्रों से भरी है।
पाखंडी आलोचकों के मुँह बंद करने के लिए ग्रामीण और शहरी भारत में यह सबसे तीखी लोकोक्ति मानी जाती है।
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Frequently Asked Questions (FAQ)
सूप बोले तो बोले, छलनी क्या बोले जिसमें बहत्तर छेद लोकोक्ति का अर्थ क्या है?
सूप बोले तो बोले, छलनी क्या बोले जिसमें बहत्तर छेद का हिंदी अर्थ "जो व्यक्ति स्वयं सैकड़ों गंभीर दोषों, पापों और अवगुणों से भरा हुआ हो, उसे किसी दूसरे के छोटे से दोष पर बोलने या उँगली उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।" होता है। अंग्रेजी भाषा में इसका तात्पर्य "The winnowing basket may speak, but why should the sieve speak when it has seventy-two holes? A heavily flawed person has no right to criticize minor faults in others." है।
What is the English meaning of "Soop Bole Toh Bole Chhalni Kya Bole"?
The English meaning of "Soop Bole Toh Bole Chhalni Kya Bole" (सूप बोले तो बोले, छलनी क्या बोले जिसमें बहत्तर छेद) is "The winnowing basket may speak, but why should the sieve speak when it has seventy-two holes? A heavily flawed person has no right to criticize minor faults in others.". An equivalent English saying is "The pot calling the kettle black / People who live in glass houses should not throw stones".
सूप बोले तो बोले, छलनी क्या बोले जिसमें बहत्तर छेद का वाक्य प्रयोग कैसे करें?
वाक्य प्रयोग: "करोड़ों के घोटाले में फंसा नेता जब दूसरे पर पाँच सौ की हेराफेरी का आरोप लगाता है, तो यही कहावत याद आती है—सूप बोले तो बोले, छलनी क्या बोले।"
सूप बोले तो बोले, छलनी क्या बोले जिसमें बहत्तर छेद की उत्पत्ति (Origin) और संदर्भ क्या है?
स्रोत: रसोई के पारंपरिक उपकरण सूप व छलनी (Kitchen Utensils Lore)। संदर्भ: अनाज फटकने वाले बाँस के 'सूप' (Winnowing basket) में कोई छेद नहीं होता और वह भूसे को अनाज से अलग करता है। किंतु आटे की 'छलनी' में सैकड़ों छेद होते हैं। यदि छलनी सूप के किसी छोटे दोष पर हँसे, तो यह हास्यास्पद है क्योंकि छलनी खुद छिद्रों से भरी है। विशेष तथ्य: पाखंडी आलोचकों के मुँह बंद करने के लिए ग्रामीण और शहरी भारत में यह सबसे तीखी लोकोक्ति मानी जाती है।