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Wisdom & Morals
Jahan Na Pahunche Ravi Wahan Pahunche Kavi
कवि और मनीषी की कल्पना शक्ति, संवेदनशीलता और अंतर्दृष्टि इतनी असीम और सूक्ष्म होती है कि वह उन गहन सत्यों को भी देख लेती है जहाँ सूर्य की किरणें भी नहीं पहुँच पातीं।
Where even the sun cannot reach, the imagination of a poet reaches; true poets possess limitless creative vision into the deepest human experiences.
Equivalent: Poets see beyond the visible horizon / The poet's eye in a fine frenzy rolling
- मानव मन के अज्ञात कोनों और सूक्ष्मतम विरह-वेदना का जैसा सजीव चित्रण सूरदास ने किया, उसे देखकर यही कहना पड़ता है कि जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि।
- वैज्ञानिक केवल बाह्य जगत को देखता है, किंतु कवि अंतर्जगत की गहराइयों को उजागर कर देता है—जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि।
- इस लघु कविता में समाज के सदियों पुराने दर्द को जिस खूबी से पिरोया गया है, वह केवल एक सच्चा कवि ही कर सकता है।
Source (स्रोत): संस्कृत काव्यशास्त्र व सुभाषित परंपरा (Classical Poetics Lore)
संस्कृत की सुप्रसिद्ध उक्ति 'अदृष्टे सूर्यतेजेऽपि कवयः पश्यन्ति चक्षुषा' का यह हिंदी लोक रूपांतरण है। सूर्य केवल बाह्य संसार को आलोकित करता है, जबकि कवि का प्रज्ञा-चक्षु मानवीय हृदय के अंधकार को मिटा देता है।
जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि
Jahan Na Pahunche Ravi Wahan Pahunche Kavi
Meaning & Connotation
कवि और मनीषी की कल्पना शक्ति, संवेदनशीलता और अंतर्दृष्टि इतनी असीम और सूक्ष्म होती है कि वह उन गहन सत्यों को भी देख लेती है जहाँ सूर्य की किरणें भी नहीं पहुँच पातीं।
English Meaning & Significance
"Where even the sun cannot reach, the imagination of a poet reaches; true poets possess limitless creative vision into the deepest human experiences."
Sentence Usages & Authentic Examples
Understand accurate usage in daily communication and academic examinations:
मानव मन के अज्ञात कोनों और सूक्ष्मतम विरह-वेदना का जैसा सजीव चित्रण सूरदास ने किया, उसे देखकर यही कहना पड़ता है कि जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि।
वैज्ञानिक केवल बाह्य जगत को देखता है, किंतु कवि अंतर्जगत की गहराइयों को उजागर कर देता है—जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि।
इस लघु कविता में समाज के सदियों पुराने दर्द को जिस खूबी से पिरोया गया है, वह केवल एक सच्चा कवि ही कर सकता है।
Origin & Context
संस्कृत काव्यशास्त्र व सुभाषित परंपरा (Classical Poetics Lore)
संस्कृत की सुप्रसिद्ध उक्ति 'अदृष्टे सूर्यतेजेऽपि कवयः पश्यन्ति चक्षुषा' का यह हिंदी लोक रूपांतरण है। सूर्य केवल बाह्य संसार को आलोकित करता है, जबकि कवि का प्रज्ञा-चक्षु मानवीय हृदय के अंधकार को मिटा देता है।
साहित्य अकादमियों और काव्य सम्मेलनों में कवियों की प्रतिभा के सम्मान में यह उक्ति सर्वोपरि मानी जाती है।
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Frequently Asked Questions (FAQ)
जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि लोकोक्ति का अर्थ क्या है?
जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि का हिंदी अर्थ "कवि और मनीषी की कल्पना शक्ति, संवेदनशीलता और अंतर्दृष्टि इतनी असीम और सूक्ष्म होती है कि वह उन गहन सत्यों को भी देख लेती है जहाँ सूर्य की किरणें भी नहीं पहुँच पातीं।" होता है। अंग्रेजी भाषा में इसका तात्पर्य "Where even the sun cannot reach, the imagination of a poet reaches; true poets possess limitless creative vision into the deepest human experiences." है।
What is the English meaning of "Jahan Na Pahunche Ravi Wahan Pahunche Kavi"?
The English meaning of "Jahan Na Pahunche Ravi Wahan Pahunche Kavi" (जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि) is "Where even the sun cannot reach, the imagination of a poet reaches; true poets possess limitless creative vision into the deepest human experiences.". An equivalent English saying is "Poets see beyond the visible horizon / The poet's eye in a fine frenzy rolling".
जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि का वाक्य प्रयोग कैसे करें?
वाक्य प्रयोग: "मानव मन के अज्ञात कोनों और सूक्ष्मतम विरह-वेदना का जैसा सजीव चित्रण सूरदास ने किया, उसे देखकर यही कहना पड़ता है कि जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि।"
जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि की उत्पत्ति (Origin) और संदर्भ क्या है?
स्रोत: संस्कृत काव्यशास्त्र व सुभाषित परंपरा (Classical Poetics Lore)। संदर्भ: संस्कृत की सुप्रसिद्ध उक्ति 'अदृष्टे सूर्यतेजेऽपि कवयः पश्यन्ति चक्षुषा' का यह हिंदी लोक रूपांतरण है। सूर्य केवल बाह्य संसार को आलोकित करता है, जबकि कवि का प्रज्ञा-चक्षु मानवीय हृदय के अंधकार को मिटा देता है। विशेष तथ्य: साहित्य अकादमियों और काव्य सम्मेलनों में कवियों की प्रतिभा के सम्मान में यह उक्ति सर्वोपरि मानी जाती है।