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Wisdom & Morals
Jaisi Sangati Baithiye Taiso Phal Deen
मनुष्य जैसे लोगों की संगति में रहता है, उसके मन, विचार, चरित्र और जीवन पर वैसा ही प्रभाव पड़ता है और उसे वैसा ही अच्छा या बुरा फल मिलता है।
As the company you keep, so will be the fruits you reap; a person's character and fate are shaped by their companionship.
Equivalent: A man is known by the company he keeps / Birds of a feather flock together
- सज्जनों के साथ रहने से मूर्ख भी बुद्धिमान बन जाता है और दुष्टों की संगति से गुणी भी भ्रष्ट हो जाता है; जैसी संगति बैठिए तैसो ही फल दीन।
- पिता ने पुत्र को जुआरियों की संगत छोड़ने की चेतावनी दी क्योंकि जैसी संगति में बैठोगे, वैसा ही फल भोगोगे।
- स्वाति नक्षत्र की एक बूँद कदली में कपूर, सीप में मोती और साँप के मुँह में विष बन जाती है—यह संगति का ही तो प्रभाव है।
Source (स्रोत): संत रहीम दास जी का नीति दोहा (Rahim's Ethics Lore)
रहीमदास जी का विख्यात दोहा है: 'कदली, सीप, भुजंग-मुख, स्वाति एक गुन तीन। जैसी संगति बैठिए, तैसोई फल दीन॥' वर्षा की एक ही बूँद अलग-अलग संगति पाकर अलग-अलग रूप ले लेती है।
जैसी संगति बैठिए, तैसो ही फल दीन
Jaisi Sangati Baithiye Taiso Phal Deen
Meaning & Connotation
मनुष्य जैसे लोगों की संगति में रहता है, उसके मन, विचार, चरित्र और जीवन पर वैसा ही प्रभाव पड़ता है और उसे वैसा ही अच्छा या बुरा फल मिलता है।
English Meaning & Significance
"As the company you keep, so will be the fruits you reap; a person's character and fate are shaped by their companionship."
Sentence Usages & Authentic Examples
Understand accurate usage in daily communication and academic examinations:
सज्जनों के साथ रहने से मूर्ख भी बुद्धिमान बन जाता है और दुष्टों की संगति से गुणी भी भ्रष्ट हो जाता है; जैसी संगति बैठिए तैसो ही फल दीन।
पिता ने पुत्र को जुआरियों की संगत छोड़ने की चेतावनी दी क्योंकि जैसी संगति में बैठोगे, वैसा ही फल भोगोगे।
स्वाति नक्षत्र की एक बूँद कदली में कपूर, सीप में मोती और साँप के मुँह में विष बन जाती है—यह संगति का ही तो प्रभाव है।
Origin & Context
संत रहीम दास जी का नीति दोहा (Rahim's Ethics Lore)
रहीमदास जी का विख्यात दोहा है: 'कदली, सीप, भुजंग-मुख, स्वाति एक गुन तीन। जैसी संगति बैठिए, तैसोई फल दीन॥' वर्षा की एक ही बूँद अलग-अलग संगति पाकर अलग-अलग रूप ले लेती है।
तुलसीदास जी ने भी मानस में लिखा है: 'सठ सुधरहिं सतसंगति पाई। पारस परसि कुघात सुहाई॥'
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Frequently Asked Questions (FAQ)
जैसी संगति बैठिए, तैसो ही फल दीन लोकोक्ति का अर्थ क्या है?
जैसी संगति बैठिए, तैसो ही फल दीन का हिंदी अर्थ "मनुष्य जैसे लोगों की संगति में रहता है, उसके मन, विचार, चरित्र और जीवन पर वैसा ही प्रभाव पड़ता है और उसे वैसा ही अच्छा या बुरा फल मिलता है।" होता है। अंग्रेजी भाषा में इसका तात्पर्य "As the company you keep, so will be the fruits you reap; a person's character and fate are shaped by their companionship." है।
What is the English meaning of "Jaisi Sangati Baithiye Taiso Phal Deen"?
The English meaning of "Jaisi Sangati Baithiye Taiso Phal Deen" (जैसी संगति बैठिए, तैसो ही फल दीन) is "As the company you keep, so will be the fruits you reap; a person's character and fate are shaped by their companionship.". An equivalent English saying is "A man is known by the company he keeps / Birds of a feather flock together".
जैसी संगति बैठिए, तैसो ही फल दीन का वाक्य प्रयोग कैसे करें?
वाक्य प्रयोग: "सज्जनों के साथ रहने से मूर्ख भी बुद्धिमान बन जाता है और दुष्टों की संगति से गुणी भी भ्रष्ट हो जाता है; जैसी संगति बैठिए तैसो ही फल दीन।"
जैसी संगति बैठिए, तैसो ही फल दीन की उत्पत्ति (Origin) और संदर्भ क्या है?
स्रोत: संत रहीम दास जी का नीति दोहा (Rahim's Ethics Lore)। संदर्भ: रहीमदास जी का विख्यात दोहा है: 'कदली, सीप, भुजंग-मुख, स्वाति एक गुन तीन। जैसी संगति बैठिए, तैसोई फल दीन॥' वर्षा की एक ही बूँद अलग-अलग संगति पाकर अलग-अलग रूप ले लेती है। विशेष तथ्य: तुलसीदास जी ने भी मानस में लिखा है: 'सठ सुधरहिं सतसंगति पाई। पारस परसि कुघात सुहाई॥'