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Wisdom & Morals
Mati Kahe Kumhar Se
समय और काल का चक्र अत्यंत बलवान और परिवर्तनशील है; आज जो शक्तिशाली होकर दूसरों पर अत्याचार या घमंड कर रहा है, कल समय का पहिया घूमते ही वह स्वयं धूल में मिल जाएगा।
The clay whispers to the potter: today you trample me underfoot, but tomorrow I shall trample you into dust; time humbles all pride.
Equivalent: Time is the great leveler / What goes around comes around
- जब सत्ताधारी नेता अपने विरोधियों पर जुल्म ढा रहा था, तो वृद्ध ने चेताया—माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रूँदे मोहि; एक दिन ऐसा आएगा मैं रूँदूंगी तोहि।
- अपनी दौलत और जवानी पर इतना घमंड मत करो, समय सबका घमंड तोड़ देता है—माटी कहे कुम्हार से।
- सिकंदर भी संसार जीतने के बाद खाली हाथ ही गया, मिट्टी ने सबको अपने भीतर समा लिया।
Source (स्रोत): संत कबीर का काल-दर्शन दोहा (Kabir's Metaphysical Verse)
संत कबीर का कालजयी दोहा है: 'माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रूँदे मोहि। इक दिन ऐसा आएगा, मैं रूँदूंगी तोहि॥' कुम्हार बर्तन बनाने के लिए मिट्टी को पैरों से रौंदता है, पर मृत्यु के बाद वही कुम्हार मिट्टी में मिलकर विलीन हो जाता है।
माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रूँदे मोहि
Mati Kahe Kumhar Se
Meaning & Connotation
समय और काल का चक्र अत्यंत बलवान और परिवर्तनशील है; आज जो शक्तिशाली होकर दूसरों पर अत्याचार या घमंड कर रहा है, कल समय का पहिया घूमते ही वह स्वयं धूल में मिल जाएगा।
English Meaning & Significance
"The clay whispers to the potter: today you trample me underfoot, but tomorrow I shall trample you into dust; time humbles all pride."
Sentence Usages & Authentic Examples
Understand accurate usage in daily communication and academic examinations:
जब सत्ताधारी नेता अपने विरोधियों पर जुल्म ढा रहा था, तो वृद्ध ने चेताया—माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रूँदे मोहि; एक दिन ऐसा आएगा मैं रूँदूंगी तोहि।
अपनी दौलत और जवानी पर इतना घमंड मत करो, समय सबका घमंड तोड़ देता है—माटी कहे कुम्हार से।
सिकंदर भी संसार जीतने के बाद खाली हाथ ही गया, मिट्टी ने सबको अपने भीतर समा लिया।
Origin & Context
संत कबीर का काल-दर्शन दोहा (Kabir's Metaphysical Verse)
संत कबीर का कालजयी दोहा है: 'माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रूँदे मोहि। इक दिन ऐसा आएगा, मैं रूँदूंगी तोहि॥' कुम्हार बर्तन बनाने के लिए मिट्टी को पैरों से रौंदता है, पर मृत्यु के बाद वही कुम्हार मिट्टी में मिलकर विलीन हो जाता है।
यह दोहा नश्वरता, अहंकार के नाश और काल-चक्र के शाश्वत सत्य का सर्वोत्तम काव्यात्मक प्रतीक है।
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Frequently Asked Questions (FAQ)
माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रूँदे मोहि लोकोक्ति का अर्थ क्या है?
माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रूँदे मोहि का हिंदी अर्थ "समय और काल का चक्र अत्यंत बलवान और परिवर्तनशील है; आज जो शक्तिशाली होकर दूसरों पर अत्याचार या घमंड कर रहा है, कल समय का पहिया घूमते ही वह स्वयं धूल में मिल जाएगा।" होता है। अंग्रेजी भाषा में इसका तात्पर्य "The clay whispers to the potter: today you trample me underfoot, but tomorrow I shall trample you into dust; time humbles all pride." है।
What is the English meaning of "Mati Kahe Kumhar Se"?
The English meaning of "Mati Kahe Kumhar Se" (माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रूँदे मोहि) is "The clay whispers to the potter: today you trample me underfoot, but tomorrow I shall trample you into dust; time humbles all pride.". An equivalent English saying is "Time is the great leveler / What goes around comes around".
माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रूँदे मोहि का वाक्य प्रयोग कैसे करें?
वाक्य प्रयोग: "जब सत्ताधारी नेता अपने विरोधियों पर जुल्म ढा रहा था, तो वृद्ध ने चेताया—माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रूँदे मोहि; एक दिन ऐसा आएगा मैं रूँदूंगी तोहि।"
माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रूँदे मोहि की उत्पत्ति (Origin) और संदर्भ क्या है?
स्रोत: संत कबीर का काल-दर्शन दोहा (Kabir's Metaphysical Verse)। संदर्भ: संत कबीर का कालजयी दोहा है: 'माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रूँदे मोहि। इक दिन ऐसा आएगा, मैं रूँदूंगी तोहि॥' कुम्हार बर्तन बनाने के लिए मिट्टी को पैरों से रौंदता है, पर मृत्यु के बाद वही कुम्हार मिट्टी में मिलकर विलीन हो जाता है। विशेष तथ्य: यह दोहा नश्वरता, अहंकार के नाश और काल-चक्र के शाश्वत सत्य का सर्वोत्तम काव्यात्मक प्रतीक है।