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Wisdom & Morals
Gaye The Roza Chhudaane Namaaz Gale Padi
किसी छोटे कष्ट, बंधन या दायित्व से मुक्ति पाने के प्रयास में उससे भी कहीं अधिक बड़ा और गंभीर संकट या उत्तरदायित्व सिर आ पड़ना।
Went seeking exemption from fasting, ended up obliged to pray; trying to get rid of a small burden only to end up with a much heavier one.
Equivalent: Out of the frying pan into the fire / To jump from the frying pan into the coals
- वह जुर्माने से बचने के लिए अधिकारी के पास सिफारिश लेकर गया, पर अधिकारी ने उल्टे पूरे कारखाने की सील लगाने का आदेश दे दिया—गए थे रोजा छुड़ाने, नमाज गले पड़ी।
- उसने काम का बोझ कम करने की अर्जी दी थी, प्रबंधन ने उसे पूरी शाखा का प्रबंधक बनाकर अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंप दी।
- छोटे कर्ज से मुक्ति के लिए उसने साहूकार से बात की, उसने पुराना मकान ही गिरवी रखवा लिया; इसे कहते हैं रोजा छुड़ाने जाकर नमाज गले पड़ना।
Source (स्रोत): मध्यकालीन काजी-मुल्ला हास्य कथा (Folk Judicial Parable)
एक लोककथा के अनुसार एक व्यक्ति रमजान के महीने में पूरे दिन भूखे रहने (रोजा रखने) की तकलीफ से तंग आकर काजी साहब के पास गया कि कोई छूट मिल जाए। काजी ने उसकी धार्मिक उदासीनता देखकर उस पर रोजे के साथ दिन में पाँच वक्त की अनिवार्य नमाज का भी कड़ा हुक्म लगा दिया।
गए थे रोज़ा छुड़ाने, नमाज़ गले पड़ी
Gaye The Roza Chhudaane Namaaz Gale Padi
Meaning & Connotation
किसी छोटे कष्ट, बंधन या दायित्व से मुक्ति पाने के प्रयास में उससे भी कहीं अधिक बड़ा और गंभीर संकट या उत्तरदायित्व सिर आ पड़ना।
English Meaning & Significance
"Went seeking exemption from fasting, ended up obliged to pray; trying to get rid of a small burden only to end up with a much heavier one."
Sentence Usages & Authentic Examples
Understand accurate usage in daily communication and academic examinations:
वह जुर्माने से बचने के लिए अधिकारी के पास सिफारिश लेकर गया, पर अधिकारी ने उल्टे पूरे कारखाने की सील लगाने का आदेश दे दिया—गए थे रोजा छुड़ाने, नमाज गले पड़ी।
उसने काम का बोझ कम करने की अर्जी दी थी, प्रबंधन ने उसे पूरी शाखा का प्रबंधक बनाकर अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंप दी।
छोटे कर्ज से मुक्ति के लिए उसने साहूकार से बात की, उसने पुराना मकान ही गिरवी रखवा लिया; इसे कहते हैं रोजा छुड़ाने जाकर नमाज गले पड़ना।
Origin & Context
मध्यकालीन काजी-मुल्ला हास्य कथा (Folk Judicial Parable)
एक लोककथा के अनुसार एक व्यक्ति रमजान के महीने में पूरे दिन भूखे रहने (रोजा रखने) की तकलीफ से तंग आकर काजी साहब के पास गया कि कोई छूट मिल जाए। काजी ने उसकी धार्मिक उदासीनता देखकर उस पर रोजे के साथ दिन में पाँच वक्त की अनिवार्य नमाज का भी कड़ा हुक्म लगा दिया।
यह लोकोक्ति अनपेक्षित रूप से भारी पड़ जाने वाले सौदों या प्रार्थनाओं पर व्यंग्य के रूप में कही जाती है।
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Frequently Asked Questions (FAQ)
गए थे रोज़ा छुड़ाने, नमाज़ गले पड़ी लोकोक्ति का अर्थ क्या है?
गए थे रोज़ा छुड़ाने, नमाज़ गले पड़ी का हिंदी अर्थ "किसी छोटे कष्ट, बंधन या दायित्व से मुक्ति पाने के प्रयास में उससे भी कहीं अधिक बड़ा और गंभीर संकट या उत्तरदायित्व सिर आ पड़ना।" होता है। अंग्रेजी भाषा में इसका तात्पर्य "Went seeking exemption from fasting, ended up obliged to pray; trying to get rid of a small burden only to end up with a much heavier one." है।
What is the English meaning of "Gaye The Roza Chhudaane Namaaz Gale Padi"?
The English meaning of "Gaye The Roza Chhudaane Namaaz Gale Padi" (गए थे रोज़ा छुड़ाने, नमाज़ गले पड़ी) is "Went seeking exemption from fasting, ended up obliged to pray; trying to get rid of a small burden only to end up with a much heavier one.". An equivalent English saying is "Out of the frying pan into the fire / To jump from the frying pan into the coals".
गए थे रोज़ा छुड़ाने, नमाज़ गले पड़ी का वाक्य प्रयोग कैसे करें?
वाक्य प्रयोग: "वह जुर्माने से बचने के लिए अधिकारी के पास सिफारिश लेकर गया, पर अधिकारी ने उल्टे पूरे कारखाने की सील लगाने का आदेश दे दिया—गए थे रोजा छुड़ाने, नमाज गले पड़ी।"
गए थे रोज़ा छुड़ाने, नमाज़ गले पड़ी की उत्पत्ति (Origin) और संदर्भ क्या है?
स्रोत: मध्यकालीन काजी-मुल्ला हास्य कथा (Folk Judicial Parable)। संदर्भ: एक लोककथा के अनुसार एक व्यक्ति रमजान के महीने में पूरे दिन भूखे रहने (रोजा रखने) की तकलीफ से तंग आकर काजी साहब के पास गया कि कोई छूट मिल जाए। काजी ने उसकी धार्मिक उदासीनता देखकर उस पर रोजे के साथ दिन में पाँच वक्त की अनिवार्य नमाज का भी कड़ा हुक्म लगा दिया। विशेष तथ्य: यह लोकोक्ति अनपेक्षित रूप से भारी पड़ जाने वाले सौदों या प्रार्थनाओं पर व्यंग्य के रूप में कही जाती है।