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Wisdom & Morals
Pratyaksh Ko Pramaan Ki Kya Aavashyakta
जो सत्य या तथ्य आँखों के सामने सर्वथा स्पष्ट, दृश्यमान और सिद्ध हो, उसे सिद्ध करने के लिए किसी अतिरिक्त सबूत, गवाह या तर्क की आवश्यकता नहीं होती।
What is directly visible needs no proof; self-evident facts and visible realities require no elaborate testimony or evidence.
Equivalent: Seeing is believing / Proof of the pudding is in the eating
- नया पुल उद्घाटन के पहले ही दिन ढह गया, अब निर्माण कार्य के भ्रष्टाचार के लिए प्रत्यक्ष को प्रमाण की क्या आवश्यकता!
- विद्यार्थी ने पूरे राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया, उसकी मेहनत के विषय में प्रत्यक्ष को प्रमाण की क्या आवश्यकता।
- जब अपराधी चोरी के माल के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया, तो प्रत्यक्ष को प्रमाण की कोई आवश्यकता नहीं रह गई।
Source (स्रोत): भारतीय न्याय दर्शन (Nyaya Philosophy Epistemology)
महर्षि गौतम के 'न्याय सूत्र' में ज्ञान के चार प्रमाण माने गए हैं: प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द। इनमें 'प्रत्यक्ष' (Pratyaksha - sensory perception) को सबसे श्रेष्ठ और अकाट्य प्रमाण माना गया है, जिसे किसी अन्य प्रमाण की दरकार नहीं होती।
प्रत्यक्ष को प्रमाण की क्या आवश्यकता
Pratyaksh Ko Pramaan Ki Kya Aavashyakta
Meaning & Connotation
जो सत्य या तथ्य आँखों के सामने सर्वथा स्पष्ट, दृश्यमान और सिद्ध हो, उसे सिद्ध करने के लिए किसी अतिरिक्त सबूत, गवाह या तर्क की आवश्यकता नहीं होती।
English Meaning & Significance
"What is directly visible needs no proof; self-evident facts and visible realities require no elaborate testimony or evidence."
Sentence Usages & Authentic Examples
Understand accurate usage in daily communication and academic examinations:
नया पुल उद्घाटन के पहले ही दिन ढह गया, अब निर्माण कार्य के भ्रष्टाचार के लिए प्रत्यक्ष को प्रमाण की क्या आवश्यकता!
विद्यार्थी ने पूरे राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया, उसकी मेहनत के विषय में प्रत्यक्ष को प्रमाण की क्या आवश्यकता।
जब अपराधी चोरी के माल के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया, तो प्रत्यक्ष को प्रमाण की कोई आवश्यकता नहीं रह गई।
Origin & Context
भारतीय न्याय दर्शन (Nyaya Philosophy Epistemology)
महर्षि गौतम के 'न्याय सूत्र' में ज्ञान के चार प्रमाण माने गए हैं: प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द। इनमें 'प्रत्यक्ष' (Pratyaksha - sensory perception) को सबसे श्रेष्ठ और अकाट्य प्रमाण माना गया है, जिसे किसी अन्य प्रमाण की दरकार नहीं होती।
संस्कृत सूत्र 'प्रत्यक्षं किम् प्रमाणम्' का यह सरल हिंदी लोक रूप है, जो भारतीय न्यायालयों में भी बहुतायत से प्रयुक्त होता है।
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Frequently Asked Questions (FAQ)
प्रत्यक्ष को प्रमाण की क्या आवश्यकता लोकोक्ति का अर्थ क्या है?
प्रत्यक्ष को प्रमाण की क्या आवश्यकता का हिंदी अर्थ "जो सत्य या तथ्य आँखों के सामने सर्वथा स्पष्ट, दृश्यमान और सिद्ध हो, उसे सिद्ध करने के लिए किसी अतिरिक्त सबूत, गवाह या तर्क की आवश्यकता नहीं होती।" होता है। अंग्रेजी भाषा में इसका तात्पर्य "What is directly visible needs no proof; self-evident facts and visible realities require no elaborate testimony or evidence." है।
What is the English meaning of "Pratyaksh Ko Pramaan Ki Kya Aavashyakta"?
The English meaning of "Pratyaksh Ko Pramaan Ki Kya Aavashyakta" (प्रत्यक्ष को प्रमाण की क्या आवश्यकता) is "What is directly visible needs no proof; self-evident facts and visible realities require no elaborate testimony or evidence.". An equivalent English saying is "Seeing is believing / Proof of the pudding is in the eating".
प्रत्यक्ष को प्रमाण की क्या आवश्यकता का वाक्य प्रयोग कैसे करें?
वाक्य प्रयोग: "नया पुल उद्घाटन के पहले ही दिन ढह गया, अब निर्माण कार्य के भ्रष्टाचार के लिए प्रत्यक्ष को प्रमाण की क्या आवश्यकता!"
प्रत्यक्ष को प्रमाण की क्या आवश्यकता की उत्पत्ति (Origin) और संदर्भ क्या है?
स्रोत: भारतीय न्याय दर्शन (Nyaya Philosophy Epistemology)। संदर्भ: महर्षि गौतम के 'न्याय सूत्र' में ज्ञान के चार प्रमाण माने गए हैं: प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द। इनमें 'प्रत्यक्ष' (Pratyaksha - sensory perception) को सबसे श्रेष्ठ और अकाट्य प्रमाण माना गया है, जिसे किसी अन्य प्रमाण की दरकार नहीं होती। विशेष तथ्य: संस्कृत सूत्र 'प्रत्यक्षं किम् प्रमाणम्' का यह सरल हिंदी लोक रूप है, जो भारतीय न्यायालयों में भी बहुतायत से प्रयुक्त होता है।